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चंद अशआर | शुभम त्रिपाठी | Hindi Urdu Shayari



क्यूँ उम्मीद हो मुझसे के फ़रियाद करूँ
जिसे अब याद नहीं मैं क्यूँ उसे याद करूँ

क्यूँ रहे मेरा किसी से कोई भी रब्त भला
क्यूँ कहा जाऊँ कम्बख़्तों से कमबख़्त भला

क्यूँ मुझसे हर दफ़ा वही एक सवाल हो
ज़रूरी तो नहीं जो तेरा है वो मेरा हाल हो

क्यूँ मेरे कमरे में कहीं भी रखी शराब ना हो
क्यूँ आदमी मर जाए यहाँ मगर ख़राब ना हो

क्यूँ हर एक ग़म का मेरे हिसाब लिया जाए
चोरी बताई नहीं जाती भला क्या किया जाए

क्यूँ होती नहीं कोई शक्ल ज़माने की यहाँ
क्यूँ कोई हद नहीं होती आज़माने की यहाँ

क्यूँ होती है घुटन कोई रोता क्यूँ है
जो नामंज़ूर हो सिरे से वही होता क्यूँ है

मुझसे मेरे नर्म दिल होने की आस ना कर
मेरे किससे सुन ले मगर एहसास ना कर

क्यूँ ये उजड़ा घर मेरा मैं आबाद करूँ
जिसे अब याद नहीं मैं उसे क्यूँ याद करूँ

Writer: Shubham Tripathi

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